वैदिक ज्योतिष में केतु (दक्षिणी पात): अर्थ, राशियाँ, रत्न और मंत्र
- का कारक
- वैराग्य, अंतर्ज्ञान, आध्यात्मिकता, शोध और अतीत
- स्वामी
- अपनी कोई राशि नहीं
- उच्च राशि
- वृश्चिक
- नीच राशि
- वृषभ
- वार
- मंगलवार
- रंग
- स्लेटी, भूरा
- रत्न
- लहसुनिया
- महादशा
- 7 वर्ष
- जिन नक्षत्रों का स्वामी है
- अश्विनी, मघा, मूल
- मंत्र
- ॐ केतवे नमः
गणेश जी की पूजा करें; कुत्तों को खाना खिलाएं; कुछ समय शांति से प्रार्थना में बिताएं।
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