मूल नक्षत्र: देवता, प्रतीक, स्वामी ग्रह, स्वभाव और नाम के अक्षर
हर चीज़ की जड़ तक पहुँचना चाहते हैं; शोधकर्ता और साधक, गहरे बदलावों में भी सहज रहते हैं।
- देवता
- निर्ऋति, विघटन की देवी
- प्रतीक
- एक साथ बँधी हुई जड़ों का गुच्छा
- स्वामी
- केतु
- गण
- राक्षस (उग्र)
- स्वभाव
- तीक्ष्ण (तीखा)
- राशियाँ
- धनु
- नाम के अक्षर
- Ye (ये), Yo (यो), Bha (भा), Bhi (भी)
शोध, जो समाप्त होना चाहिए उसे समाप्त करना, गहरा उपचार, आंतरिक साधना के लिए शुभ।
गणेश जी और हनुमान जी की पूजा कीजिए; इस नक्षत्र में जन्म होने पर मूल नक्षत्र शांति कराने की परंपरा है।
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